Monday, 7 November 2016

आज भी है - Aaj Bhi Hai


मेरी  दुनिया,तेरी  दुनिया  से आहत आज भी है 

तेरी चाहत की चाहत मेरे दिल में आज भी है 

कभी मैं कह न सका तुमसे अपने दिल की बातें
मेरे दिल में रहो ये मेरी हसरत आज भी है 

दिखायी  देती है जो बंद पलकों के गगन में 
चमकते चाँद सी वो तेरी सूरत आज भी है 

मेरी आँखों में कोई दर्द समाता नहीं अब 
कि तेरी मुस्कराहट मेरे दिल में आज भी है 

नहीं रहती है अब खामोश ये तन्हाइयाँ भी 
तेरी उड़ती हुई जुल्फों की आहट आज भी है 

ना  जाने क्या हुआ है, दोस्त सब रूठे हैं मुझसे 
तेरे होंठो पे मेरा नाम शायद आज भी है 

-Abhishek Singh 


-अभिषेक सिंह